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Altaf Raja
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सांख्ययोग Part [6]
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः । आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥ भावार्थ : हे कुंतीपुत्र! सर्दी-गर्मी और सुख-दु...
सांख्ययोग Part [10]
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् । तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि ॥ भावार्थ : किन्तु यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने वाला...
सांख्ययोग Part [13]
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् । सम्भावितस्य चाकीर्ति- र्मरणादतिरिच्यते ॥ भावार्थ : तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाल...
सांख्ययोग Part [5]
( सांख्ययोग का विषय ) श्री भगवानुवाच अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे । गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥ भावार्थ : श...
अर्जनविषादयोग Part [9]
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान् बन्धूनवस्थितान् ॥ कृपया परयाविष्टो विषीदत्रिदमब्रवीत् । भावार्थ : उन उपस्थित सम्पूर्ण बंधुओं को देख...
सांख्ययोग Part [3]
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो- यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः । यानेव हत्वा न जिजीविषाम- स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥ भावार्थ : ह...
बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो
🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼 *प्रार्थना सभा के लिये प्रेरक प्रसंग* ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻ *बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो* अत्यंत गरी...
सांख्ययोग Part [20]
यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् । नाभिनंदति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ भावार्थ : जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित ह...
अर्जुनविषादयोग page [1]
अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युय...
सांख्ययोग Part [19]
( स्थिरबुद्धि पुरुष के लक्षण और उसकी महिमा ) अर्जुन उवाच स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव । स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत क...
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सांख्ययोग Part [6]
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः । आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥ भावार्थ : हे कुंतीपुत्र! सर्दी-गर्मी और सुख-दु...
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अर्जनविषादयोग Part [9]
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान् बन्धूनवस्थितान् ॥ कृपया परयाविष्टो विषीदत्रिदमब्रवीत् । भावार्थ : उन उपस्थित सम्पूर्ण बंधुओं को देख...
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न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो- यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः । यानेव हत्वा न जिजीविषाम- स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥ भावार्थ : ह...
बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो
🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼🙇🏼 *प्रार्थना सभा के लिये प्रेरक प्रसंग* ♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻ *बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो* अत्यंत गरी...
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यः सर्वत्रानभिस्नेहस्तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम् । नाभिनंदति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ भावार्थ : जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित ह...
अर्जुनविषादयोग page [1]
अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युय...
सांख्ययोग Part [19]
( स्थिरबुद्धि पुरुष के लक्षण और उसकी महिमा ) अर्जुन उवाच स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव । स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत क...
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